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॥ नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ॥

आत्म-ज्ञान व अमरत्व • Self-Knowledge & Inner Strength

आत्मा की अमरता और अपनी वास्तविक क्षमता का बोध

Discovering your indestructible divine nature beyond the body (25 Curated Bhagavad Gita Verses)

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 16 (BG 2.16)

नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः। उभयोरपि दृष्टोऽन्तस्त्वनयोस्तत्त्वदर्शिभिः॥ २.१६॥

हिंदी भावार्थ: असत् वस्तु का तो अस्तित्व नहीं है और सत् का कभी अभाव नहीं है। इस प्रकार इन दोनों का ही तत्त्व, तत्त्वदर्शी ज्ञानी पुरुषों के द्वारा देखा गया है।।

English Meaning: The unreal has no being; there is no non-being of the real; the truth about both has been seen by the knowers of the truth (or the seers of the essence).

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 17 (BG 2.17)

अविनाशि तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम्। विनाशमव्ययस्यास्य न कश्चित् कर्तुमर्हति॥ २.१७॥

हिंदी भावार्थ: उस वस्तु को तुम अविनाशी जानों, जिससे यह सम्पूर्ण जगत् व्याप्त है। इस अव्यय का नाश करने में कोई भी समर्थ नहीं है।।

English Meaning: Know that to be indestructible, by which all this is pervaded. No one can cause the destruction of that, the Imperishable.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 18 (BG 2.18)

अन्तवन्त इमे देहा नित्यस्योक्ताः शरीरिणः। अनाशिनोऽप्रमेयस्य तस्माद्युध्यस्व भारत॥ २.१८॥

हिंदी भावार्थ: इस नाशरहित अप्रमेय नित्य देही आत्मा के ये सब शरीर नाशवान् कहे गये हैं। इसलिये हे भारत ! तुम युद्ध करो।।

English Meaning: These bodies of the embodied Self, which are eternal, indestructible, and immeasurable, are said to have an end. Therefore, fight, O Arjuna.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 23 (BG 2.23)

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥ २.२३॥

हिंदी भावार्थ: इस आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते और न अग्नि इसे जला सकती है ; जल इसे गीला नहीं कर सकता और वायु इसे सुखा नहीं सकती।।

English Meaning: Weapons cannot cut it, fire cannot burn it, water cannot wet it, wind cannot dry it.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 24 (BG 2.24)

अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च। नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः॥ २.२४॥

हिंदी भावार्थ: क्योंकि यह आत्मा अच्छेद्य (काटी नहीं जा सकती), अदाह्य (जलाई नहीं जा सकती), अक्लेद्य (गीली नहीं हो सकती ) और अशोष्य (सुखाई नहीं जा सकती) है; यह नित्य, सर्वगत, स्थाणु (स्थिर), अचल और सनातन है।।

English Meaning: This Self cannot be cut, burned, wetted, nor dried up; it is eternal, all-pervasive, stable, immovable, and ancient.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 30 (BG 2.30)

देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत। तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि॥ २.३०॥

हिंदी भावार्थ: हे भारत ! यह देही आत्मा सबके शरीर में सदा ही अवध्य है, इसलिए समस्त प्राणियों के लिए तुम्हें शोक करना उचित नहीं।।

English Meaning: This indweller in the body of everyone is ever indestructible, O Arjuna; therefore, you should not grieve for any creature.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 69 (BG 2.69)

या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी। यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः॥ २.६९॥

हिंदी भावार्थ: सब प्रणियों के लिए जो रात्रि है। उसमें संयमी पुरुष जागता है और जहाँ सब प्राणी जागते हैं। वह (तत्त्व को) देखने वाले मुनि के लिए रात्रि है।।

English Meaning: That which is night to all beings, in that the self-controlled man is awake; when all beings are awake, that is night for the sage who sees.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 4, श्लोक 37 (BG 4.37)

यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन। ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा॥ ४.३७॥

हिंदी भावार्थ: जैसे प्रज्जवलित अग्नि ईन्धन को भस्मसात् कर देती है, वैसे ही, हे अर्जुन ! ज्ञानरूपी अग्नि सम्पूर्ण कर्मों को भस्मसात् कर देती है।।

English Meaning: As the blazing fire reduces fuel to ashes, O Arjuna, so does the fire of knowledge reduce all actions to ash.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 4, श्लोक 38 (BG 4.38)

न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते। तत्स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति॥ ४.३८॥

हिंदी भावार्थ: इस लोक में ज्ञान के समान पवित्र करने वाला, निसंदेह, कुछ भी नहीं है। योग में संसिद्ध पुरुष स्वयं ही उसे (उचित) काल में आत्मा में प्राप्त करता है।।

English Meaning: Verily, there is no purifier in this world like knowledge. He who is perfected in Yoga finds it within the Self in due time.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 5, श्लोक 16 (BG 5.16)

ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः। तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम्॥ ५.१६॥

हिंदी भावार्थ: परन्तु जिनका वह अज्ञान आत्मज्ञान से नष्ट हो जाता है, उनके लिए वह ज्ञान, सूर्य के सदृश, परमात्मा को प्रकाशित करता है।।

English Meaning: But to those whose ignorance is destroyed by knowledge of the Self, like the sun, knowledge reveals the Supreme Brahman.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 5, श्लोक 17 (BG 5.17)

तद्बुद्धयस्तदात्मानस्तन्निष्ठास्तत्परायणाः। गच्छन्त्यपुनरावृत्तिं ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः॥ ५.१७॥

हिंदी भावार्थ: जिनकी बुद्धि उस (परमात्मा) में स्थित है, जिनका मन तद्रूप हुआ है, उसमें ही जिनकी निष्ठा है, वह (ब्रह्म) ही जिनका परम लक्ष्य है, ज्ञान के द्वारा पापरहित पुरुष अपुनरावृत्ति को प्राप्त होते हैं, अर्थात् उनका पुनर्जन्म नहीं होता है।।

English Meaning: Their intellect absorbed in That, their self being That, established in That, with That as their supreme goal, they go whence there is no return, their sins dispelled by knowledge.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 6, श्लोक 29 (BG 6.29)

सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि। ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः॥ ६.२९॥

हिंदी भावार्थ: योगयुक्त अन्त:करण वाला और सर्वत्र समदर्शी योगी आत्मा को सब भूतों में और भूतमात्र को आत्मा में देखता है।।

English Meaning: With the mind harmonized by Yoga, he sees the Self abiding in all beings and all beings in the Self; he sees the same everywhere.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 6, श्लोक 30 (BG 6.30)

यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति। तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति॥ ६.३०॥

हिंदी भावार्थ: जो पुरुष मुझे सर्वत्र देखता है और सबको मुझमें देखता है, उसके लिए मैं नष्ट नहीं होता (अर्थात् उसके लिए मैं दूर नहीं होता) और वह मुझसे वियुक्त नहीं होता।।

English Meaning: He who sees Me everywhere and sees everything in Me, never becomes separated from Me, nor do I from him.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 6, श्लोक 31 (BG 6.31)

सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थितः। सर्वथा वर्तमानोऽपि स योगी मयि वर्तते॥ ६.३१॥

हिंदी भावार्थ: जो पुरुष एकत्वभाव मंे स्थित हुआ सम्पूर्ण भूतों में स्थित मुझे भजता है, वह योगी सब प्रकार से वर्तता हुआ (रहता हुआ) मुझमें स्थित रहता है।।

English Meaning: He who, being established in unity, worships Me, who dwells in all beings, that yogi abides in Me, whatever their mode of living may be.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 7, श्लोक 4 (BG 7.4)

भूमिरापोऽनलो वायुः खं मनो बुद्धिरेव च। अहङ्कार इतीयं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा॥ ७.४॥

हिंदी भावार्थ: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश तथा मन, बुद्धि और अहंकार - यह आठ प्रकार से विभक्त हुई मेरी प्रकृति है।।

English Meaning: Earth, water, fire, air, ether, mind, intellect, and egoism—thus is My Nature divided eightfold.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 7, श्लोक 5 (BG 7.5)

अपरेयमितस्त्वन्यां प्रकृतिं विद्धि मे पराम्। जीवभूतां महाबाहो ययेदं धार्यते जगत्॥ ७.५॥

हिंदी भावार्थ: हे महाबाहो ! यह अपरा प्रकृति है। इससे भिन्न मेरी जीवरूपी पराप्रकृति को जानो, जिससे यह जगत् धारण किया जाता है।।

English Meaning: O mighty-armed Arjuna, this is the inferior Prakriti; know it as distinct from My higher Prakriti, the very life-element, by which this world is upheld.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 7, श्लोक 7 (BG 7.7)

मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय। मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव॥ ७.७॥

हिंदी भावार्थ: हे धनंजय ! मुझसे श्रेष्ठ (परे) अन्य किचिन्मात्र वस्तु नहीं है। यह सम्पूर्ण जगत् सूत्र में मणियों के सदृश मुझमें पिरोया हुआ है।।

English Meaning: There is nothing higher than Me, O Arjuna. All this is strung on Me, like clusters of gems on a string.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 13, श्लोक 17 (BG 13.17)

अविभक्तं च भूतेषु विभक्तमिव च स्थितम्।भूतभर्तृ च तज्ज्ञेयं ग्रसिष्णु प्रभविष्णु च॥ १३.१७॥

हिंदी भावार्थ: और वह अविभक्त है, तथापि वह भूतों में विभक्त के समान स्थित है। वह ज्ञेय ब्रह्म भूतमात्र का भर्ता, संहारकर्ता और उत्पत्ति कर्ता है।।

English Meaning: Undivided yet, It exists as if divided in beings; It is to be known as the supporter of beings; It devours and It generates.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 13, श्लोक 27 (BG 13.27)

यावत्सञ्जायते किञ्चित्सत्त्वं स्थावरजङ्गमम्।क्षेत्रक्षेत्रज्ञसंयोगात्तद्विद्धि भरतर्षभ॥ १३.२७॥

हिंदी भावार्थ: हे भरत श्रेष्ठ ! यावन्मात्र जो कुछ भी स्थावर जंगम (चराचर) वस्तु उत्पन्न होती है, उस सबको तुम क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के संयोग से उत्पन्न हुई जानो।।

English Meaning: Wherever a being is born, whether unmoving or moving, know thou, O best of the Bharatas (Arjuna), that it is from the union of the field and its knower.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 13, श्लोक 28 (BG 13.28)

समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम्।विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति॥ १३.२८॥

हिंदी भावार्थ: जो पुरुष समस्त नश्वर भूतों में अनश्वर परमेश्वर को समभाव से स्थित देखता है, वही (वास्तव में) देखता है।।

English Meaning: He who sees the Supreme Lord existing truly in all beings, the imperishable within the perishable, sees indeed.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 13, श्लोक 29 (BG 13.29)

समं पश्यन्हि सर्वत्र समवस्थितमीश्वरम्।न हिनस्त्यात्मनाऽऽत्मानं ततो याति परां गतिम्॥ १३.२९॥

हिंदी भावार्थ: निश्चय ही, वह पुरुष सर्वत्र सम भाव से स्थित परमेश्वर को समान हुआ आत्मा (स्वयं) के द्वारा आत्मा (स्वयं) का नाश नहीं करता है, इससे वह परम गति को प्राप्त होता है।।

English Meaning: For he who truly sees the same Lord dwelling everywhere does not destroy the Self by the self; rather, he attains the highest goal.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 13, श्लोक 31 (BG 13.31)

यदा भूतपृथग्भावमेकस्थमनुपश्यति।तत एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा॥ १३.३१॥

हिंदी भावार्थ: यह पुरुष जब भूतों के पृथक् भावों को एक (परमात्मा) में स्थित देखता है तथा उस (परमात्मा) से ही यह विस्तार हुआ जानता है, तब वह ब्रह्म को प्राप्त होता है।।

English Meaning: When a person sees all beings as resting in the One and emanating from the One alone, they then become Brahman.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 13, श्लोक 34 (BG 13.34)

यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः।क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत॥ १३.३४॥

हिंदी भावार्थ: हे भारत ! जिस प्रकार एक ही सूर्य इस सम्पूर्ण लोक को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार एक ही क्षेत्री (क्षेत्रज्ञ) सम्पूर्ण क्षेत्र को प्रकाशित करता है।।

English Meaning: Just as the one sun illuminates the entire world, so too does the Lord of the field (Supreme Self) illuminate the entire field, O Arjuna.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 15, श्लोक 12 (BG 15.12)

यदादित्यगतं तेजो जगद्भासयतेऽखिलम्।यच्चन्द्रमसि यच्चाग्नौ तत्तेजो विद्धि मामकम्॥ १५.१२॥

हिंदी भावार्थ: जो तेज सूर्य में स्थित होकर सम्पूर्ण जगत् को प्रकाशित करता है तथा जो तेज चन्द्रमा में है और अग्नि में है, उस तेज को तुम मेरा ही जानो।।

English Meaning: That light which resides in the sun, illuminating the whole world; that which is in the moon and in the fire—know that light to be Mine.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 15, श्लोक 15 (BG 15.15)

सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च।वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्यो वेदान्तकृद्वेदविदेव चाहम्॥ १५.१५॥

हिंदी भावार्थ: मैं ही समस्त प्राणियों के हृदय में स्थित हूँ। मुझसे ही स्मृति, ज्ञान और अपोहन (उनका अभाव) होता है। समस्त वेदों के द्वारा मैं ही वेद्य (जानने योग्य) वस्तु हूँ तथा वेदान्त का और वेदों का ज्ञाता भी मैं ही हूँ।।

English Meaning: And I am seated in the hearts of all; from Me come memory and knowledge, as well as their absence. I am verily That which has to be known by all the Vedas; I am indeed the author of the Vedanta and the knower of the Vedas.

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