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॥ कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ॥

कर्म, निष्कामता व कर्तव्य • Duty, Purpose & Focus in Action

बिना फल की चिंता किए श्रेष्ठ कर्म की कला

Mastering selfless action without fear of failure or anxiety of results (22 Curated Bhagavad Gita Verses)

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 47 (BG 2.47)

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ २.४७॥

हिंदी भावार्थ: कर्म करने मात्र में तुम्हारा अधिकार है। फल में कभी नहीं। तुम कर्मफल के हेतु वाले मत होना और अकर्म में भी तुम्हारी आसक्ति न हो।।

English Meaning: Your right is only to work, but not to its results; do not let the results of action be your motive, nor let your attachment be to inaction.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 48 (BG 2.48)

योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय। सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥ २.४८॥

हिंदी भावार्थ: हे धनंजय आसक्ति को त्याग कर तथा सिद्धि और असिद्धि में समभाव होकर योग में स्थित हुये तुम कर्म करो। यह समभाव ही योग कहलाता है।।

English Meaning: Perform action, O Arjuna, being steadfast in Yoga, abandoning attachment and balanced in success and failure; evenness of mind is called Yoga.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 49 (BG 2.49)

दूरेण ह्यवरं कर्म बुद्धियोगाद्धनञ्जय। बुद्धौ शरणमन्विच्छ कृपणाः फलहेतवः॥ २.४९॥

हिंदी भावार्थ: इस बुद्धियोग की तुलना में(सकाम) कर्म अत्यन्त निकृष्ट हैं। इसलिये हे धनंजय तुम बद्धि की शरण लो फल की इच्छा करनेवाले कृपण (दीन) हैं।।

English Meaning: Far lower than the Yoga of wisdom is action, O Arjuna. Seek thou refuge in wisdom; wretched are those whose motive is the fruit.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 50 (BG 2.50)

बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते। तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्॥ २.५०॥

हिंदी भावार्थ: समत्वबुद्धि युक्त पुरुष यहां (इस जीवन में) पुण्य और पाप इन दोनों कर्मों को त्याग देता है। इसलिये तुम योग से युक्त हो जाओ। कर्मों में कुशलता योग है।।

English Meaning: Endowed with wisdom and evenness of mind, one casts off in this life both good and evil deeds; therefore, devote yourself to Yoga; Yoga is skill in action.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 3, श्लोक 4 (BG 3.4)

न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते। न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति॥ ३.४॥

हिंदी भावार्थ: कर्मों के न करने से मनुष्य नैर्ष्कम्य को प्राप्त नहीं होता और न कर्मों के संन्यास से ही वह सिद्धि (पूर्णत्व) प्राप्त करता है।।

English Meaning: Man does not reach actionlessness by not performing actions; nor does he attain perfection by mere renunciation.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 3, श्लोक 5 (BG 3.5)

न हि कश्िचत्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्। कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः॥ ३.५॥

हिंदी भावार्थ: कोई भी पुरुष कभी क्षणमात्र भी बिना कर्म किए नहीं रह सकता क्योंकि प्रकृति से उत्पन्न गुणों के द्वारा अवश हुए सब (पुरुषों) से कर्म करवा लिया जाता है।।

English Meaning: Verily, no one can remain for even a moment without performing action; for everyone is made to act helplessly, indeed, by the qualities born of Nature.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 3, श्लोक 8 (BG 3.8)

नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः। शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः॥ ३.८॥

हिंदी भावार्थ: तुम (अपने) नियत (कर्तव्य) कर्म करो क्योंकि अकर्म से श्रेष्ठ कर्म है। तुम्हारे अकर्म होने से (तुम्हारा) शरीर निर्वाह भी नहीं सिद्ध होगा।।

English Meaning: Perform your bounden duty, for action is superior to inaction, and even the maintenance of the body would not be possible for you through inaction.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 3, श्लोक 9 (BG 3.9)

यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः। तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसंगः समाचर॥ ३.९॥

हिंदी भावार्थ: यज्ञ के लिये किये हुए कर्म के अतिरिक्त अन्य कर्म में प्रवृत्त हुआ यह पुरुष कर्मों द्वारा बंधता है इसलिए हे कौन्तेय आसक्ति को त्यागकर यज्ञ के निमित्त ही कर्म का सम्यक् आचरण करो।।

English Meaning: The world is bound by actions other than those performed for the sake of sacrifice; do thou, therefore, O son of Kunti (Arjuna), perform actions for that sake alone, free from attachment.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 3, श्लोक 19 (BG 3.19)

तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर। असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः॥ ३.१९॥

हिंदी भावार्थ: इसलिए, तुम अनासक्त होकर सदैव कर्तव्य कर्म का सम्यक् आचरण करो; क्योकि, अनासक्त पुरुष कर्म करता हुआ परमात्मा को प्राप्त होता है।।

English Meaning: Therefore, without attachment, always perform the actions that should be done; for by performing actions without attachment, one reaches the Supreme.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 3, श्लोक 20 (BG 3.20)

कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः। लोकसंग्रहमेवापि संपश्यन्कर्तुमर्हसि॥ ३.२०॥

हिंदी भावार्थ: जनकादि (ज्ञानी जन) भी कर्म द्वारा ही संसिद्धि को प्राप्त हुये लोक संग्रह (लोक रक्षण) को भी देखते हुये; तुम कर्म करने योग्य हो।।

English Meaning: Janaka and others attained perfection indeed through action alone; even with the intention of protecting the masses, you should perform action.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 3, श्लोक 21 (BG 3.21)

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः। स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥ ३.२१॥

हिंदी भावार्थ: श्रेष्ठ पुरुष जैसा आचरण करता है, अन्य लोग भी वैसा ही अनुकरण करते हैं; वह पुरुष जो कुछ प्रमाण कर देता है, लोग भी उसका अनुसरण करते हैं।।

English Meaning: Whatever a great man does, others also do; whatever he establishes as the standard, the world follows.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 3, श्लोक 25 (BG 3.25)

सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत। कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्िचकीर्षुर्लोकसंग्रहम्॥ ३.२५॥

हिंदी भावार्थ: हे भारत ! कर्म में आसक्त हुए अज्ञानीजन जैसे कर्म करते हैं वैसे ही विद्वान् पुरुष अनासक्त होकर, लोकसंग्रह (लोक कल्याण) की इच्छा से कर्म करे।।

English Meaning: As the ignorant act out of attachment to action, O Bharata, so should the wise act without attachment, wishing for the welfare of the world.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 3, श्लोक 35 (BG 3.35)

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः॥ ३.३५॥

हिंदी भावार्थ: सम्यक् प्रकार से अनुष्ठित परधर्म की अपेक्षा गुणरहित स्वधर्म का पालन श्रेयष्कर है; स्वधर्म में मरण कल्याणकारक है (किन्तु) परधर्म भय को देने वाला है।।

English Meaning: Better is one's own duty, though devoid of merit, than the duty of another well discharged. Better is death in one's own duty; the duty of another is fraught with fear.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 4, श्लोक 18 (BG 4.18)

कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः। स बुद्धिमान् मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत्॥ ४.१८॥

हिंदी भावार्थ: जो पुरुष कर्म में अकर्म और अकर्म में कर्म देखता है, वह मनुष्यों में बुद्धिमान है, वह योगी सम्पूर्ण कर्मों को करने वाला है।।

English Meaning: He who sees inaction in action and action in inaction, he is wise among men; he is a yogi and performer of all actions.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 4, श्लोक 19 (BG 4.19)

यस्य सर्वे समारम्भाः कामसङ्कल्पवर्जिताः। ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पण्डितं बुधाः॥ ४.१९॥

हिंदी भावार्थ: जिसके समस्त कार्य कामना और संकल्प से रहित हैं, ऐसे उस ज्ञानरूप अग्नि के द्वारा भस्म हुये कर्मों वाले पुरुष को ज्ञानीजन पण्डित कहते हैं।।

English Meaning: He whose undertakings are all devoid of desires and selfish purposes, and whose actions have been burned by the fire of knowledge, the wise call him a sage.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 4, श्लोक 20 (BG 4.20)

त्यक्त्वा कर्मफलासङ्गं नित्यतृप्तो निराश्रयः। कर्मण्यभिप्रवृत्तोऽपि नैव किञ्चित्करोति सः॥ ४.२०॥

हिंदी भावार्थ: जो पुरुष, कर्मफलासक्ति को त्यागकर, नित्यतृप्त और सब आश्रयों से रहित है वह कर्म में प्रवृत्त होते हुए भी (वास्तव में) कुछ भी नहीं करता है।।

English Meaning: Having abandoned attachment to the fruits of the action, ever content, depending on nothing, he does not do anything even while being engaged in activity.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 8, श्लोक 7 (BG 8.7)

तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च। मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम्॥ ८.७॥

हिंदी भावार्थ: इसलिए, तुम सब काल में मेरा निरन्तर स्मरण करो; और युद्ध करो मुझमें अर्पण किये मन, बुद्धि से युक्त हुए निःसन्देह तुम मुझे ही प्राप्त होओगे।।

English Meaning: Therefore, at all times, remember Me only and fight. With your mind and intellect fixed on Me, you will undoubtedly come to Me alone.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 11, श्लोक 33 (BG 11.33)

तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व जित्वा शत्रून् भुङ्क्ष्व राज्यं समृद्धम्। मयैवैते निहताः पूर्वमेव निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन्॥ ११.३३॥

हिंदी भावार्थ: इसलिए तुम उठ खड़े हो जाओ और यश को प्राप्त करो; शत्रुओं को जीतकर समृद्ध राज्य को भोगो। ये सब पहले से ही मेरे द्वारा मारे जा चुके हैं। हे सव्यसाचिन्! तुम केवल निमित्त ही बनो।।

English Meaning: Therefore, stand up and obtain fame. Conquer the enemies and enjoy the unparalleled kingdom. Verily, by Me they have already been slain; be thou a mere instrument, O Arjuna.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 18, श्लोक 45 (BG 18.45)

स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः।स्वकर्मनिरतः सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु॥ १८.४५॥

हिंदी भावार्थ: अपने-अपने स्वाभाविक कर्म में अभिरत मनुष्य संसिद्धि को प्राप्त कर लेता है। स्वकर्म में रत मनुष्य किस प्रकार सिद्धि प्राप्त करता है, उसे तुम सुनो।।

English Meaning: Each person devoted to their own duty attains perfection. How they attain perfection while being engaged in their own duty, hear now.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 18, श्लोक 46 (BG 18.46)

यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्।स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः॥ १८.४६॥

हिंदी भावार्थ: जिस (परमात्मा) से भूतमात्र की प्रवृत्ति अर्थात् उत्पत्ति हुई है और जिससे यह सम्पूर्ण जगत् व्याप्त है, उस (परमात्मा) की स्वकर्म द्वारा पूजा करके मनुष्य सिद्धि को प्राप्त होता है।।

English Meaning: He from whom all the beings have evolved and by whom all this is pervaded, worshipping Him with his own duty, one attains perfection.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 18, श्लोक 47 (BG 18.47)

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्॥ १८.४७॥

हिंदी भावार्थ: सम्यक् अनुष्ठित परधर्म की अपेक्षा गुणरहित स्वधर्म श्रेष्ठ है। (क्योंकि) स्वभाव से नियत किये गये कर्म को करते हुए मनुष्य पाप को नहीं प्राप्त करता।।

English Meaning: Better is one's own duty, even if it is destitute of merits, than the duty of another well performed. He who does the duty ordained by his own nature incurs no sin.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 18, श्लोक 48 (BG 18.48)

सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत्।सर्वारम्भा हि दोषेण धूमेनाग्निरिवावृताः॥ १८.४८॥

हिंदी भावार्थ: हे कौन्तेय ! दोषयुक्त होने पर भी सहज कर्म को नहीं त्यागना चाहिए; क्योंकि सभी कर्म दोष से आवृत होते है, जैसे धुयें से अग्नि।।

English Meaning: One should not, O Arjuna, abandon the duty to which one is born, though it may be faulty; for, all undertakings are enveloped by evil, just as fire is by smoke.

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