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॥ अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे ॥

शोक, मोह व अवसाद निवारण • Healing Grief, Loss & Overthinking

कठिन समय में संबल, धैर्य और शोक से मुक्ति

Finding solace and eternal perspective during loss and despair (19 Curated Bhagavad Gita Verses)

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 11 (BG 2.11)

अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे। गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः॥ २.११॥

हिंदी भावार्थ: श्री भगवान् ने कहा -- (अशोच्यान्) जिनके लिये शोक करना उचित नहीं है, उनके लिये तुम शोक करते हो और ज्ञानियों के से वचनों को कहते हो, परन्तु ज्ञानी पुरुष मृत (गतासून्) और जीवित (अगतासून्) दोनों के लिये शोक नहीं करते हैं।।

English Meaning: The Blessed Lord said, "You have grieved for those who should not be grieved for; yet, you speak words of wisdom. The wise grieve neither for the living nor for the dead."

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 12 (BG 2.12)

न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः। न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम्॥ २.१२॥

हिंदी भावार्थ: वास्तव में न तो ऐसा ही है कि मैं किसी काल में नहीं था अथवा तुम नहीं थे अथवा ये राजालोग नहीं थे और न ऐसा ही है कि इससे आगे हम सब नहीं रहेंगे।।

English Meaning: Nor, at any time, was I not, nor thou, nor these rulers of men; nor, verily, shall we ever cease to be hereafter.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 13 (BG 2.13)

देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा। तथा देहान्तरप्राप्तिर्धीरस्तत्र न मुह्यति॥ २.१३॥

हिंदी भावार्थ: जैसे इस देह में देही जीवात्मा की कुमार, युवा और वृद्धावस्था होती है, वैसे ही उसको अन्य शरीर की प्राप्ति होती है; धीर पुरुष इसमें मोहित नहीं होता है।।

English Meaning: Just as the embodied soul passes through childhood, youth, and old age in this body, so too does it pass into another body; the steadfast one does not grieve over this.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 14 (BG 2.14)

मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः। आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत॥ २.१४॥

हिंदी भावार्थ: हे कुन्तीपुत्र ! शीत और उष्ण और सुख दुख को देने वाले इन्द्रिय और विषयों के संयोग का प्रारम्भ और अन्त होता है; वे अनित्य हैं, इसलिए, हे भारत ! उनको तुम सहन करो।।

English Meaning: The contact of the senses with the objects, O son of Kunti, which causes heat and cold, pleasure and pain, has a beginning and an end; they are impermanent; endure them bravely, O Arjuna.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 15 (BG 2.15)

यं हि न व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ। समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते॥ २.१५॥

हिंदी भावार्थ: हे पुरुषश्रेष्ठ ! दुख और सुख में समान भाव से रहने वाले जिस धीर पुरुष को ये व्यथित नहीं कर सकते हैं वह अमृतत्व (मोक्ष) का अधिकारी होता है।।

English Meaning: That firm man, whom surely these afflictions do not, O chief among men, to whom pleasure and pain are the same, is fit for attaining immortality.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 19 (BG 2.19)

य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम्। उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते॥ २.१९॥

हिंदी भावार्थ: जो इस आत्मा को मारने वाला समझता है और जो इसको मरा समझता है वे दोनों ही नहीं जानते हैं, क्योंकि यह आत्मा न मरता है और न मारा जाता है।।

English Meaning: He who takes the Self to be the slayer and he who thinks it is slain, neither of them knows. It does not slay, nor is it slain.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 20 (BG 2.20)

न जायते म्रियते वा कदाचि न्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः। अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥ २.२०॥

हिंदी भावार्थ: यह आत्मा किसी काल में भी न जन्मता है और न मरता है और न यह एक बार होकर फिर अभावरूप होने वाला है। यह आत्मा अजन्मा, नित्य, शाश्वत और पुरातन है, शरीर के नाश होने पर भी इसका नाश नहीं होता।।

English Meaning: It is not born, nor does it ever die; after having been, it again does not cease to be; unborn, eternal, changeless, and ancient, it is not killed when the body is killed.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 21 (BG 2.21)

वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम्। कथं स पुरुषः पार्थ कं घातयति हन्ति कम्॥ २.२१॥

हिंदी भावार्थ: हे पार्थ ! जो पुरुष इस आत्मा को अविनाशी, नित्य और अव्ययस्वरूप जानता है, वह कैसे किसको मरवायेगा और कैसे किसको मारेगा।

English Meaning: Whoever knows it to be indestructible, eternal, unborn, and inexhaustible, how can that person slay, O Arjuna, or cause to be slain?

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 22 (BG 2.22)

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णा न्यन्यानि संयाति नवानि देही॥ २.२२॥

हिंदी भावार्थ: जैसे मनुष्य जीर्ण वस्त्रों को त्यागकर दूसरे नये वस्त्रों को धारण करता है, वैसे ही देही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्याग कर दूसरे नए शरीरों को प्राप्त होता है।।

English Meaning: Just as a man casts off worn-out clothes and puts on new ones, so too the embodied Self casts off worn-out bodies and enters others that are new.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 23 (BG 2.23)

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥ २.२३॥

हिंदी भावार्थ: इस आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते और न अग्नि इसे जला सकती है ; जल इसे गीला नहीं कर सकता और वायु इसे सुखा नहीं सकती।।

English Meaning: Weapons cannot cut it, fire cannot burn it, water cannot wet it, wind cannot dry it.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 24 (BG 2.24)

अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च। नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः॥ २.२४॥

हिंदी भावार्थ: क्योंकि यह आत्मा अच्छेद्य (काटी नहीं जा सकती), अदाह्य (जलाई नहीं जा सकती), अक्लेद्य (गीली नहीं हो सकती ) और अशोष्य (सुखाई नहीं जा सकती) है; यह नित्य, सर्वगत, स्थाणु (स्थिर), अचल और सनातन है।।

English Meaning: This Self cannot be cut, burned, wetted, nor dried up; it is eternal, all-pervasive, stable, immovable, and ancient.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 25 (BG 2.25)

अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते। तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि॥ २.२५॥

हिंदी भावार्थ: यह आत्मा अव्यक्त, अचिन्त्य और अविकारी कहा जाता है; इसलिए इसको इस प्रकार जानकर तुमको शोक करना उचित नहीं है।।

English Meaning: This Self is said to be unmanifested, unthinkable, and unchangeable. Therefore, knowing this to be so, you should not grieve.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 26 (BG 2.26)

अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम्। तथापि त्वं महाबाहो नैवं शोचितुमर्हसि॥ २.२६॥

हिंदी भावार्थ: और यदि तुम आत्मा को नित्य जन्मने और नित्य मरने वाला मानो तो भी, हे महाबाहो ! इस प्रकार शोक करना तुम्हारे लिए उचित नहीं है।।

English Meaning: But even if thou thinkest of It as constantly being born and constantly dying, even then, O mighty-armed one, thou shouldst not grieve.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 27 (BG 2.27)

जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च। तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि॥ २.२७॥

हिंदी भावार्थ: जन्मने वाले की मृत्यु निश्चित है और मरने वाले का जन्म निश्चित है; इसलिए जो अटल है अपरिहार्य - है उसके विषय में तुमको शोक नहीं करना चाहिये।।

English Meaning: For the born, death is certain, and for the dead, birth is certain; therefore, you should not grieve over the inevitable.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 28 (BG 2.28)

अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत। अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना॥ २.२८॥

हिंदी भावार्थ: हे भारत ! समस्त प्राणी जन्म से पूर्व और मृत्यु के बाद अव्यक्त अवस्था में रहते हैं और बीच में व्यक्त होते हैं। फिर उसमें चिन्ता या शोक की क्या बात है ।

English Meaning: Beings are unmanifest in their beginning, manifest in their middle state, O Arjuna, and unmanifest again in their end. What is there to grieve about?

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 30 (BG 2.30)

देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत। तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि॥ २.३०॥

हिंदी भावार्थ: हे भारत ! यह देही आत्मा सबके शरीर में सदा ही अवध्य है, इसलिए समस्त प्राणियों के लिए तुम्हें शोक करना उचित नहीं।।

English Meaning: This indweller in the body of everyone is ever indestructible, O Arjuna; therefore, you should not grieve for any creature.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 11, श्लोक 32 (BG 11.32)

कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः। ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे येऽवस्थिताः प्रत्यनीकेषु योधाः॥ ११.३२॥

हिंदी भावार्थ: श्रीभगवान् ने कहा -- मैं लोकों का नाश करने वाला प्रवृद्ध काल हूँ। इस समय, मैं इन लोकों का संहार करने में प्रवृत्त हूँ। जो प्रतिपक्षियों की सेना में स्थित योद्धा हैं, वे सब तुम्हारे बिना भी नहीं रहेंगे।।

English Meaning: The Blessed Lord said, "I am the full-grown, world-destroying Time, now engaged in destroying the worlds. Even without you, none of the warriors arrayed in the hostile armies will live."

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 12, श्लोक 17 (BG 12.17)

यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षति।शुभाशुभपरित्यागी भक्ितमान्यः स मे प्रियः॥ १२.१७॥

हिंदी भावार्थ: जो न हर्षित होता है और न द्वेष करता है; न शोक करता है और न आकांक्षा; तथा जो शुभ और अशुभ को त्याग देता है, वह भक्तिमान् पुरुष मुझे प्रिय है।।

English Meaning: He who neither rejoices nor hates, nor grieves nor desires, renouncing both good and evil, and who is full of devotion, is dear to Me.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 18, श्लोक 54 (BG 18.54)

ब्रह्मभूतः प्रसन्नात्मा न शोचति न काङ्क्षति।समः सर्वेषु भूतेषु मद्भक्तिं लभते पराम्॥ १८.५४॥

हिंदी भावार्थ: ब्रह्मभूत (जो साधक ब्रह्म बन गया है), प्रसन्न मन वाला पुरुष न इच्छा करता है और न शोक, समस्त भूतों के प्रति सम होकर वह मेरी परा भक्ति को प्राप्त करता है।।

English Meaning: Becoming Brahman, serene in the Self, he neither grieves nor desires; he is the same to all beings, and obtains supreme devotion to Me.

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