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॥ सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ॥

समर्पण, भक्ति व अभय • Surrender, Devotion & Fearlessness

ईश्वर में पूर्ण विश्वास और सर्वथा भयमुक्त जीवन

Unwavering divine refuge, love, and absolute protection (21 Curated Bhagavad Gita Verses)

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 4, श्लोक 10 (BG 4.10)

वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः। बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः॥ ४.१०॥

हिंदी भावार्थ: राग भय और क्रोध से रहित मनमय मेरे शरण हुए बहुत से पुरुष ज्ञान रुप तप से पवित्र‌ हुए मेरे स्वरुप को प्राप्त हुए हैं।।

English Meaning: Freed from attachment, fear, and anger, absorbed in Me, taking refuge in Me, purified by the fire of knowledge, many have attained My Being.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 4, श्लोक 11 (BG 4.11)

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्। मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः॥ ४.११॥

हिंदी भावार्थ: जो मुझे जैसे भजते हैं, मैं उन पर वैसे ही अनुग्रह करता हूँ; हे पार्थ सभी मनुष्य सब प्रकार से, मेरे ही मार्ग का अनुवर्तन करते हैं।।

English Meaning: In whatever way men approach Me, even so do I reward them; My path do men tread in all ways, O Arjuna.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 7, श्लोक 16 (BG 7.16)

चतुर्विधा भजन्ते मां जनाः सुकृतिनोऽर्जुन। आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी ज्ञानी च भरतर्षभ॥ ७.१६॥

हिंदी भावार्थ: हे भरत श्रेष्ठ अर्जुन ! उत्तम कर्म करने वाले (सुकृतिन:) आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी और ज्ञानी ऐसे चार प्रकार के लोग मुझे भजते हैं।।

English Meaning: Four kinds of virtuous men worship Me, O Arjuna, and they are the distressed, the seekers of knowledge, the seekers of wealth, and the wise, O Lord of the Bharatas.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 7, श्लोक 17 (BG 7.17)

तेषां ज्ञानी नित्ययुक्त एकभक्ितर्विशिष्यते। प्रियो हि ज्ञानिनोऽत्यर्थमहं स च मम प्रियः॥ ७.१७॥

हिंदी भावार्थ: उनमें भी मुझ से नित्ययुक्त, अनन्य भक्ति वाला ज्ञानी श्रेष्ठ है, क्योंकि ज्ञानी को मैं अत्यन्त प्रिय हूँ और वह मुझे अत्यन्त प्रिय है।।

English Meaning: Of them, the wise who are ever steadfast and devoted to the One, excel; for I am exceedingly dear to the wise, and they are dear to Me.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 7, श्लोक 18 (BG 7.18)

उदाराः सर्व एवैते ज्ञानी त्वात्मैव मे मतम्। आस्थितः स हि युक्तात्मा मामेवानुत्तमां गतिम्॥ ७.१८॥

हिंदी भावार्थ: (यद्यपि) ये सब उत्कृष्ट हैं, परन्तु ज्ञानी तो मेरा स्वरूप ही है ऐसा मेरा मत है, क्योंकि वह स्थिर बुद्धि ज्ञानी अति उत्तम गतिस्वरूप मुझमें अच्छी प्रकार स्थित है।।

English Meaning: Indeed, all these are noble; however, I consider the wise man as My very Self; for, he is steadfast in mind and established in Me alone as the supreme goal.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 9, श्लोक 22 (BG 9.22)

अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥ ९.२२॥

हिंदी भावार्थ: अनन्य भाव से मेरा चिन्तन करते हुए जो भक्तजन मेरी ही उपासना करते हैं, उन नित्ययुक्त पुरुषों का योगक्षेम मैं वहन करता हूँ।।

English Meaning: For those men who worship Me alone, thinking of no one else, for those ever-united, I secure what they have not already possessed and preserve what they already possess.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 9, श्लोक 26 (BG 9.26)

पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति। तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः॥ ९.२६॥

हिंदी भावार्थ: जो कोई भी भक्त मेरे लिए पत्र, पुष्प, फल, जल आदि भक्ति से अर्पण करता है, उस शुद्ध मन के भक्त का वह भक्तिपूर्वक अर्पण किया हुआ (पत्र पुष्पादि) मैं भोगता हूँ अर्थात् स्वीकार करता हूँ।।

English Meaning: Whoever offers Me with devotion a leaf, a flower, a fruit, or a little water, that, so offered devotedly by the pure-minded, I accept.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 9, श्लोक 29 (BG 9.29)

समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः। ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम्॥ ९.२९॥

हिंदी भावार्थ: मैं समस्त भूतों में सम हूँ; न कोई मुझे अप्रिय है और न प्रिय; परन्तु जो मुझे भक्तिपूर्वक भजते हैं, वे मुझमें और मैं भी उनमें हूँ।।

English Meaning: I am the same to all beings; there is none hateful or dear to Me; but those who worship Me with devotion are in Me, and I am also in them.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 9, श्लोक 30 (BG 9.30)

अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक्। साधुरेव स मन्तव्यः सम्यग्व्यवसितो हि सः॥ ९.३०॥

हिंदी भावार्थ: यदि कोई अतिशय दुराचारी भी अनन्यभाव से मेरा भक्त होकर मुझे भजता है, वह साधु ही मानने योग्य है, क्योंकि वह यथार्थ निश्चय वाला है।।

English Meaning: Even if the most sinful worships Me, with devotion to no one else, he should indeed be regarded as righteous, for he has rightly resolved.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 9, श्लोक 31 (BG 9.31)

क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति। कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्तः प्रणश्यति॥ ९.३१॥

हिंदी भावार्थ: हे कौन्तेय, वह शीघ्र ही धर्मात्मा बन जाता है और शाश्वत शान्ति को प्राप्त होता है। तुम निश्चयपूर्वक सत्य जानो कि मेरा भक्त कभी नष्ट नहीं होता।।

English Meaning: Soon he becomes righteous and attains eternal peace; O Arjuna, proclaim thou for certain that My devotee never perishes.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 9, श्लोक 34 (BG 9.34)

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु। मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः॥ ९.३४॥

हिंदी भावार्थ: (तुम) मुझमें स्थिर मन वाले बनो; मेरे भक्त और मेरे पूजन करने वाले बनो; मुझे नमस्कार करो; इस प्रकार मत्परायण (अर्थात् मैं ही जिसका परम लक्ष्य हूँ ऐसे) होकर आत्मा को मुझसे युक्त करके तुम मुझे ही प्राप्त होओगे।।

English Meaning: Fix your mind on Me; be devoted to Me; sacrifice to Me; bow down to Me; having thus united your whole self to Me, taking Me as the supreme goal, you will come to Me.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 10, श्लोक 8 (BG 10.8)

अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते। इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः॥ १०.८॥

हिंदी भावार्थ: मैं ही सबका प्रभव स्थान हूँ; मुझसे ही सब (जगत्) विकास को प्राप्त होता है, इस प्रकार जानकर बुधजन भक्ति भाव से युक्त होकर मुझे ही भजते हैं।।

English Meaning: I am the source of all; from me everything evolves; Understanding this, the wise, endowed with meditation, worship me.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 10, श्लोक 9 (BG 10.9)

मच्चित्ता मद्गतप्राणा बोधयन्तः परस्परम्। कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च॥ १०.९॥

हिंदी भावार्थ: मुझमें ही चित्त को स्थिर करने वाले और मुझमें ही प्राणों (इन्द्रियों) को अर्पित करने वाले भक्तजन, सदैव परस्पर मेरा बोध कराते हुए, मेरे ही विषय में कथन करते हुए सन्तुष्ट होते हैं और रमते हैं।।

English Meaning: With their minds and lives wholly absorbed in Me, they enlighten each other and ever speak of Me, being satisfied and delighted.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 10, श्लोक 10 (BG 10.10)

तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम्। ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते॥ १०.१०॥

हिंदी भावार्थ: उन (मुझ से) नित्य युक्त हुए और प्रेमपूर्वक मेरा भजन करने वाले भक्तों को, मैं वह 'बुद्धियोग' देता हूँ जिससे वे मुझे प्राप्त होते हैं।।

English Meaning: To those who are ever steadfast, worshipping me with love, I give the yoga of discrimination, by which they come to me.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 10, श्लोक 11 (BG 10.11)

तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः। नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता॥ १०.११॥

हिंदी भावार्थ: उनके ऊपर अनुग्रह करने के लिए मैं उनके अन्त:करण में स्थित होकर, अज्ञानजनित अन्धकार को प्रकाशमय ज्ञान के दीपक द्वारा नष्ट करता हूँ।।

English Meaning: Out of mere compassion for them, I, dwelling within their selves, destroy the darkness born of ignorance with the luminous lamp of knowledge.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 12, श्लोक 13 (BG 12.13)

अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च।निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी॥ १२.१३॥

हिंदी भावार्थ: भूतमात्र के प्रति जो द्वेषरहित है तथा सबका मित्र तथा करुणावान् है; जो ममता और अहंकार से रहित, सुख और दु:ख में सम और क्षमावान् है।।

English Meaning: He who hates no creature, is friendly and compassionate to all, is free from attachment and egoism, is balanced in pleasure and pain, and is forgiving.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 12, श्लोक 14 (BG 12.14)

सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः।मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः॥ १२.१४॥

हिंदी भावार्थ: जो संयतात्मा, दृढ़निश्चयी योगी सदा सन्तुष्ट है, जो अपने मन और बुद्धि को मुझमें अर्पण किये हुए है, जो ऐसा मेरा भक्त है, वह मुझे प्रिय है।।

English Meaning: Ever content, steady in meditation, self-controlled, possessing firm conviction, with the mind and intellect dedicated to Me, he, My devotee, is dear to Me.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 12, श्लोक 19 (BG 12.19)

तुल्यनिन्दास्तुतिर्मौनी सन्तुष्टो येनकेनचित्।अनिकेतः स्थिरमतिर्भक्ितमान्मे प्रियो नरः॥ १२.१९॥

हिंदी भावार्थ: जिसको निन्दा और स्तुति दोनों ही तुल्य है, जो मौनी है, जो किसी अल्प वस्तु से भी सन्तुष्ट है, जो अनिकेत है, वह स्थिर बुद्धि का भक्तिमान् पुरुष मुझे प्रिय है।।

English Meaning: He to whom censure and praise are equal, who is silent, content with anything, homeless, of a steady mind, and full of devotion; that man is dear to me.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 12, श्लोक 20 (BG 12.20)

ये तु धर्म्यामृतमिदं यथोक्तं पर्युपासते।श्रद्दधाना मत्परमा भक्तास्तेऽतीव मे प्रियाः॥ १२.२०॥

हिंदी भावार्थ: जो भक्त श्रद्धावान् तथा मुझे ही परम लक्ष्य समझने वाले हैं और इस यथोक्त धर्ममय अमृत का अर्थात् धर्ममय जीवन का पालन करते हैं, वे मुझे अतिशय प्रिय हैं।।

English Meaning: They who follow this immortal Dharma, endowed with faith and regarding Me as their supreme goal, are exceedingly dear to Me.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 18, श्लोक 65 (BG 18.65)

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे॥ १८.६५॥

हिंदी भावार्थ: तुम मच्चित, मद्भक्त और मेरे पूजक (मद्याजी) बनो और मुझे नमस्कार करो; (इस प्रकार) तुम मुझे ही प्राप्त होगे; यह मैं तुम्हे सत्य वचन देता हूँ,(क्योंकि) तुम मेरे प्रिय हो।।

English Meaning: Fix your mind on Me, be devoted to Me, sacrifice to Me, bow down to Me. You will come to Me; I truly promise you this, for you are dear to Me.

🕉️ भगवद्गीता अध्याय 18, श्लोक 66 (BG 18.66)

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥ १८.६६॥

हिंदी भावार्थ: सब धर्मों का परित्याग करके तुम एक मेरी ही शरण में आओ, मैं तुम्हें समस्त पापों से मुक्त कर दूँगा, तुम शोक मत करो।।

English Meaning: Abandon all duties and take refuge in Me alone; I will liberate you from all sins; do not grieve.

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